एफआरआई की सुरक्षा एमटीएस कर्मचारियों के हाथो में?
एमटीएस कर्मचारियों से कराई जा रही सुरक्षा गार्ड की नोकरी
सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर एफआरआई करा रहा है अपने ही स्थाई कर्मचारियों से सुरक्षा गार्ड की नोकरी
क्या मान लिया जाये की एफआरआई के पास सुरक्षा गार्ड को रखने के लिये फंड की कमी है?
एमटीएस कर्मचारियों से दिन रात कराया जा रहा है सुरक्षा गार्ड का कार्य, जिसका उनको अनुभव भी नहीं है
विपिन सिंह, ब्यूरो चीफ
चारधाम टाईम्स न्यूज
देहरादून।
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) देहरादून भारत सरकार के अधीन है, जहां पर प्रत्येक दिन हजारों पर्यटक आते है। वर्तमान में एफआरआई पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। कारण बताया जा रहा है कि यह फैसला सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आंतरिक बदलावों के कारण लिया गया ।
सुत्रों की माने तो इसके पीछे कुछ और ही वजह सामाने आई है। एफआरआई की सुरक्षा में प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से कार्य कर रहे है सुरक्षा गार्डो को हटा दिया गया है। सुरक्षा गार्डा को हटाकर उनकी जगह स्थाई कर्मचारियों एमटीएस (बहु कार्य कर्मचारी) से दिन-रात सुरक्षा गार्ड का कार्य कराया जा रहा है। एमटीएस कर्मचारी स्थाई पद पर नियुक्त होते है, इन्हें ऑफिस के कार्यो को करने के लिए भर्ती किया जाता है जबकि एफआरआई में इन कर्मचारियों से सुरक्षा गार्ड का कार्य कराया जा रहा है, जो इनका कार्य भी नहीं है, और ना ही इन्हे इस कार्य का अनुभव है। दिन रात की सुरक्षा ड्यिटी कर रहे इन कर्मचारियों को शारीरिक एवं मानसिक कठिनाईयों सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर इनके स्वास्थ्य पर भी हो रहा है।
देहरादून में भारत सरकार के अनेक कार्यालय है जिनकी सुरक्षा का दायित्व प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी के पास है। किसी भी कार्यालय में एमटीएस से सुरक्षा गार्डो का कार्य नहीं कराया जाता है केवल एफआरआई ही एक मात्र कार्यालय है जहां ऐसा हो रहा है।
भारत सरकार के इतने महत्वपूर्ण संस्थान की सुरक्षा एमटीएस कर्मचारियों से कराई जा रही है जो एक महत्वपूर्ण सोचनीय बिन्दु है।
