March 2, 2026

पिथौरागढ़ में भी लिए गए कफ सिरप के सैंपल, बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री पर लगाई गई रोक

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पिथौरागढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई बच्चों की मौत के बाद कफ सिरप विवादों में है। कई राज्यों ने कप सिरप की बिक्री पर बैन भी लगा दिया है। उत्तराखंड सरकार ने भी इस मामले पर एक्शन लिया है। उत्तराखंड में भी कफ सिरप के लिए सैंपल लिए जा रहे है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर बिल्कुल भी कोताही नहीं बरतने के निर्देश दिए है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बच्चों को दी जाने वाली कफ सिरप की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में मेडिकल स्टोर्स और सीएमएसडी (केंद्रीय चिकित्सा सामग्री डिपो) पर बड़ी छापेमारी अभियान चलाया है।
आयुक्त एवं अपर आयुक्त एफडीए उत्तराखंड के सख्त आदेशों के अनुपालन में औषधि निरीक्षक पंकज पंत के नेतृत्व में यह विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान मेडिकल स्टोरों और सीएमएसडी पिथौरागढ़ से कफ सिरप के कुल छह नमूने जब्त किए गए हैं। इनमें तीन नमूने मेडिकल स्टोरों से और तीन नमूने सीएमएसडी से संग्रहित किए गए हैं। इन सभी नमूनों को गुणवत्ता जांच के लिए राज्य औषधि विश्लेषणशाला भेजा जाएगा। कार्रवाई के दौरान औषधि निरीक्षक पंकज पंत ने मेडिकल स्टोर संचालकों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को डॉक्टर के परामर्श (प्रिस्क्रिप्शन) के बिना खांसी की दवा बिल्कुल न बेचें।
दो साल से कम आयु के बच्चों को खांसी की दवा किसी भी परिस्थिति में नहीं दी जानी चाहिए। एफडीए विभाग ने बताया कि संग्रहित नमूनों की लैब रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत नियमानुसार और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। औषधि निरीक्षक पंकज पंत ने बताया कि जनपद में यह जांच और छापेमारी की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों को केवल सुरक्षित और मानक गुणवत्ता की दवाइयां ही मिलें।
राजस्थान और मध्य प्रदेश की घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी बयान आया था। उन्होंने कहा था कि बच्चों की सुरक्षा और जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्मयंत्री पुष्कर सिंह धामी हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रदेश में बिकने वाली हर दवा सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाली हो। जन स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और बच्चों की सुरक्षा पर किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार प्रदेश में औषधि गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और सुदृढ़ करने की दिशा में भी काम कर रही है।

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