पैक्स सचिव-कर्मचारियों की कलमबंद हड़ताल जारी

एम-पैक्स का पंजीकरण निरस्त करने समेत छह सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी

रुद्रप्रयाग,  समान कार्य एवं व्यवसाय वाली नवगठित एम-पैक्स का पंजीकरण निरस्त करने समेत छह सूत्रीय मांगों को लेकर पैक्स सचिव एवं कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी कलमबंद हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल के चलते सहकारी समितियों में लेन-देन सहित विभिन्न कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की तो 5 अक्टूबर से देहरादून स्थित निबंधक कार्यालय में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
पैक्स सचिव एवं कर्मचारी संयुक्त संगठन उत्तराखंड के आह्वान पर सचिवों एवं कर्मचारियों ने एक अक्टूबर से कलमबंद हड़ताल शुरू की है। इससे पहले 18 सितंबर से संगठन द्वारा सूचनाओं, बैठकों, मेलों एवं कैंपों का बहिष्कार किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन अभी तक वेतन सहित अन्य सुविधाओं की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है।
संगठन ने समान कार्य एवं व्यवसाय वाली नवगठित एम-पैक्स का पंजीकरण निरस्त करने तथा वर्तमान संचालित एम-पैक्स के व्यवसाय और नए कारोबार की संभावनाओं के आधार पर ही नई पैक्स गठित करने की मांग की है। साथ ही मिनी बैंकों के निवेश संरक्षण और समितियों द्वारा वितरित ऋण की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की मांग उठाई गई। इसके अलावा प्रदेश के सभी पैक्स सचिवों एवं कर्मचारियों को सहकारिता ढांचे में शामिल करने तथा पैक्स कैडर सचिव एवं सहकारी कर्मचारियों को राज्य स्वास्थ्य योजना व गोल्डन कार्ड से जोड़ने की मांग की गई है। संगठन ने कैडर फंड, ग्रेड वेतन, नियमितीकरण अंशदान, वेतन विसंगति, सी-153 एवं सी-57 से संबंधित मांगों पर शासनादेश जारी करने की भी मांग की।
कर्मचारियों ने पदोन्नति कैडर सहित यथास्थिति पदों पर पदोन्नति, वेतनमान, भविष्य निधि एवं सेवानिवृत्ति देयकों का निर्धारण तथा पैक्स कैडर सचिवों को शाखा प्रबंधक एवं सहायक विकास अधिकारी के पदों तक पदोन्नति के अवसर देने की मांग भी उठाई। इस दौरान कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राणा, महामंत्री शिव सिंह, उपाध्यक्ष लक्ष्मण बर्त्वाल, कोषाध्यक्ष भूप सिंह, शैलेश कुमार, सुरेंद्र गोस्वामी, नरेश गौड़, हुकम पंवार सहित बड़ी संख्या में पैक्स सचिव एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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